तेरी मोहब्बत काफ़ी है ज़िंदगी बिताने के लिए,
किसी की आरज़ू नहीं दिल बहलाने के लिए।
तू नहीं मिला तो क्या हो गया, ऐ अजनबी!
तेरी यादें काफ़ी हैं मुझे मुस्कुराने के लिए।
बहुत कोशिश की तुझे दिल से निकालने की,
पर कोई वजह न मिली तुझे भुलाने के लिए।
हर साँस में तेरा ही एहसास बसा रहता है,
अब दुआ भी नहीं माँगते तुझे पाने के लिए।
तेरे बिना ये सारा जहाँ अधूरा सा लगता है,
कोई ख्वाब भी बाकी नहीं सजाने के लिए।
बादल भी तेरा नाम लिए फिरते हैं अक्सर,
सावन भी तरसता है तुझे भिगाने के लिए।
मैं हर शेर तुझी से दिल लगाकर कहता हूँ,
मैं ये शायरी लिखता हूँ तुझे सुनाने के लिए।
तेरी ही यादें काफ़ी हैं मुझे मुस्कुराने के लिए,
तमन्ना नहीं किसी और से दिल लगाने के लिए।
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