खबर तक नहीं लगेगी ,जब मैं मर जाऊंगा .. poetry by stranger

तेरी जिंदगी से मैं चुप चाप निकाल जाऊंगा..!

मौसम जैसा तू बदला , मैं भी बदल जाऊंगा..!!


जब तेरे बिना ही चलना है इस सफर में 

थोड़ा लड़खड़ाऊंगा लेकिन संभाल जाऊंगा


दिल्ली आकर थोड़ा सा बिगड़ गया हूं 

अभी बिगड़ा हूं एक दिन सुधार जाऊंगा..!


शराफत से रहता हूं तो रहने दो, वरना 

अपनी शराफत के हद से गुजर जाऊगा..!


गरं अब कभी आई जिंदगी में लौटकर..

तो तुझे अपना कहने से मुकर जाऊंगा..!


तू हमेशा खुश रहना ,तू अपनी दुनिया में ...

खबर तक नहीं लगेगी ,जब मैं मर जाऊंगा..!!

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