कभी फ़ुर्सत में मुस्कुराना सीखूँगा,


कभी फ़ुर्सत में मुस्कुराना सीखूँगा,

जो खो गया , उसे भुलाना सीखूँगा।


जैसा हूँ, वैसा ही काफी हूँ मैं,

बस ख़ुद को ये समझाना सीखूँगा।


हर ख़्वाब ज़रूरी नहीं पूरा हो,

ये बात भी दिल को बताना सीखूँगा।


ना होगी ज़रूरत किसी सहारे की,

ख़ुद को मजबूत बनाना सीखूँगा।


नसीब से शिकवा नहीं अब मुझे,

जो मिलेगा, उसे अपनाना सीखूँगा


कभी फ़ुर्सत में मुस्कुराना सीखूँगा,

जो खो गया , उसे भुलाना सीखूँगा


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